The NavRas of Life

Deeper you go, Lighter you feel!

आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है

'आज' फिर गुजरने लगा है
'कल' जैसा लगने लगा है
'सन्नाटा' चीख रहा है
'स्याह' आंख मींच रहा है
'बेताबी' थक रही है
'खामोशी' कुछ बक रही है
हर कोना मोन है
'आइना' पूछे तु कौन है
अधर सिर्फ थिरक रहा है
जवाब फिर उलझ रहा है
दिल कहीं छुप गया है
आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है

इजहार जरूरी थोड़ी है
हर चाहत प्यार थोड़ी है
मन का हो तो सबसे अच्छा
वो तुम्हारे मन का हो जरूरी थोड़ी है
इसे अधूरापन कहूं या जरूरतें कम
सबमें अकेले होना शान थोड़ी है
पी तो लेता हूं कभी ऐसे ही शौंक से
तुझे भूलने को पियूं, ऐसा तू आसमान थोड़ी है

वो नजर से दूर है, वो नजर के पास है
बंद आंखे हसीन सपने है, खुली आंखे स्याह रात है
हरेक रात में नींद और नींद में सपने और सपनो में तुम जरूरी नहीं
आजाद नींद के सपने तुम्हारे गुलाम थोड़ी है

बीती थी, बीती है, बीतेगी जरूर आज भी, कितनी भी स्याह हो रात,
बस पहली किरण का आगाज, फिर टिकना अंधेरे का अंदाज थोड़ी है

आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है
बिखरे है सपने, गुम है मुस्कुराहट कहीं
जो तुझे मिला नहीं वो तेरी मंजिल था ही नहीं
बस टूटा है एक आसमान, आखरी मुकाम थोड़ी है

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