सरकते रेत से हर पल
संजोता छननी से हर कण
न रुकता कोई भी आ कर
समझाता खुद को अकेला पाकर
नकल करता कुछ दिखने की
ढूंढता खुद अपनी असल
कहां जाए किसे ढूंढे
हम तो खुदी से बेखबर
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Deeper you go, Lighter you feel!
सरकते रेत से हर पल
संजोता छननी से हर कण
न रुकता कोई भी आ कर
समझाता खुद को अकेला पाकर
नकल करता कुछ दिखने की
ढूंढता खुद अपनी असल
कहां जाए किसे ढूंढे
हम तो खुदी से बेखबर
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