ना कली ही रहा ना फूल बन सका
कुछ ऐसे इश्क हमारा फनां हो गया
ना इजहार किया ना इंकार किया
फिर भी न जाने ये कैसे बयां हो गया
शाम सुनहरी खिली, पंछी घर को चले
तेरा ख्याल ही हमारा मकां हो गया

Deeper you go, Lighter you feel!
ना कली ही रहा ना फूल बन सका
कुछ ऐसे इश्क हमारा फनां हो गया
ना इजहार किया ना इंकार किया
फिर भी न जाने ये कैसे बयां हो गया
शाम सुनहरी खिली, पंछी घर को चले
तेरा ख्याल ही हमारा मकां हो गया

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