कर्म ही तो अपने है बाकी सब पराया है
खुश रहना ही जीना है बाकी तो सब माया है
हर कर्म का हिसाब होगा, सारे विचार खंगाले जाएंगे
वक्त आइना लेकर बैठेगा, अक्स कैसे संभाले जाएंगे
ये जिंदगी का चक्कर है, सब लौट कर आयेगा
बोता है पेड़ बबूल का, आम कहां से पाएगा
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