The NavRas of Life

Deeper you go, Lighter you feel!

तुमको देखता रहा

तुमको देखता रहा
और ये सोचता रहा
क्या तुमने भी मुझे देखा था?
या मेरा वो एक भलेखा था?

तुम भी तो मुस्कुराई थी
मुझे लगा शरमाई भी थी
तुम भी तो सब जानती थी
मुझे पहचानती थी

एक अलग सा आनंद था
दूर से देखने मे
अपने ही दिल मे छुप कर
खूब सपने बुनने में

बात कभी करी नही
पहचान कभी बड़ी नही
सोचता रहा सदा
तुम्हे बुरा न लगे जरा

काश बचपन फिर आए कभी
हम फिर मिले कभी
क्या तुम फिर से मुकुराओगी?
फिर से शर्माओगी?

पर अब ना मिलना कभी
जिन्दगी ज्यादा नहीं बची
दिल जरा बीमार है
रुकने को तैयार है

तुम नज़र ना आना अभी
धड़कने ना बड़ाना अभी
अगले जन्म में अब मिलेंगे
फिर से देखूंगा तुम्हे

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One response to “तुमको देखता रहा”

  1. Very nice… Well penned 👍

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