The NavRas of Life

Deeper you go, Lighter you feel!

धुंधला सा हुआ मैं

मकड़ियों के जाल में
अपने ही ख्याल में
उलझे हुए सवाल में
वक्त की रफ्तार में
खोता हुआ सा मैं

आकांक्षाओं के दवाब में
और दिखने की चाह में
मुखोटो के बाजार में
उपस्थिति के अभाव में
धुंधला हुआ सा मैं

वक्त को ढूंढता
रेत को दबोचता
खुद को नकारता
शीशे को निहारता
विलुप्त हुआ सा मैं

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