
बिखरा न कर रोज कच्चे कांच की तरह
कटते है मेरे हाथ समेटते हुए
Sharadprinja.com
बिखरा न कर रोज कच्चे कांच की तरह
कटते है मेरे हाथ समेटते हुए
Deeper you go, Lighter you feel!

बिखरा न कर रोज कच्चे कांच की तरह
कटते है मेरे हाथ समेटते हुए
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बिखरा न कर रोज कच्चे कांच की तरह
कटते है मेरे हाथ समेटते हुए
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