Author: SharadPrinja.com
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टोमडी साहिब – लुप्त होता प्रसिद्ध तीर्थ
Till 1947, Gujrawalan district of Punjab used to be a famous Hindu pilgrimage place. People used to come to Mandir Tomri Sahib, Baddo-ki Goasain for annual festival of Narsing Chodash and budh purnima (“Mela Yag”) and monthly chodash of every shukla paksha for Jyoti darshan and blessings of Sadguru. During the mela yag occasion, a…
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आलस्य ज्ञान! Lethargic Wisdom !
हे आलस्य तू भी कितना आलसी है क्या तेरा एक ही ग्राहक है? जब देखो मेरे पास बैठा रहता है पहले तो कभी कभी मेरे पास आता था, अब 24 घंटे यहीं पसरा रहता है — देख मैं तुझे कितना प्यार करता हूँ, तेरी हर बात मानता हूँ तुझे याद है उस दिन जब सुबह…
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Hindi Diwas
कुछ पंकतियां हिंदी दिवस पर :- माँ ने पाला, माँ ने पोसा, हाथ पकड कर चलना सीखायाबड़ा हुआ पढ़ोसन लगी प्यारी, उससे मिलकर रोब जो आया आधुनिक बनने के चक्कर में, उसने माँ से पीछा छुडायापढ़ोसन के पिज्जा बर्गर के आगे, लगे घर का खाना पराया ज्ञान शिखर वो मातृ छाया, लगे पुत्र को अब…
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Temple Site is up now www.TomriSahib.in
Happy to inform everyone that our Mandir site Tomrisahib.in is up now this is newly constructed as the old one Tomrisahib.com was non operational due to Net4India issue. We tried for many months to get the domain name and data recovered however no success. May Baba ji bless everyone! Dhan Baba Saidas Avtaar Ramanand Ji…
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Mitti – मिट्टी (Clay)
मिट्टी तेरी, मिट्टी मेरी, मिट्टी में होना विलय मिट्टी मिट्टी से क्यों लड़े, ऐसा क्या है ध्यये निराकार साकार ने, दिया सब कुछ मिट्टी बतायें मिट्टी से ऊपजे, मिट्टी मिले, मिट्टी संचय काहे मिट्टी सृष्टि की कोख है, सब जीवो का मूल राम कृपा से हो गई, मिट्टी कृष्ण चरणन की धूल मिट्टी तू तो…
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US – Afgan satire
ना वो अफगानिस्तान के निकले, न किसी पठान के निकले वो तो कुछ फिरंगे थे, जो अंग्रेजीस्तान के निकले जोंक की तरह हर खनीज को लूटा, खज़ाने खाली खाली कर वो परेशान से निकले जिससे सत्ता छिनी थी, उसी को नवाज़ दी जाते जाते भी वो कर गए एक एहसान दुनिया पर, लौट कर बुद्धू…
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Kanha – Milan ki Pyaas
कहां मिलोगे मुझे कन्हैया, कुछ तो अपनी राह बताओ उम्र बीत गयी तुमको ढूँढ़ते, कभी कही तो टकरा जाओ मैंने तो जन जन से पूछा, बहती हुई पवन से पुछा कहाँ छिप गए हो मेरे कान्हा, अब बस और न मुझको तडपाओ हम तो तेरे दास है स्वामी, तू तो है अन्तर्यामी हम भक्तो से…
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Jealousy discussion of Krishan Shringaar Articles
ये चर्चा है श्री कृष्ण के तीन अभिन्न श्रृंगारो की, कैसे वो एक दूसरे से प्रेम युक्त ईर्षा करते है बांसुरी बोली कृष्ण चरण पर लिपटी धुल से – हे बड़भाड़ी धुल रानी, ऐसी किस्मत कहाँ से लिखवाई जिन चरनन का वंदन करे देवता, तू उनपर लिपटत जाई साधु संत तुझे पाने ख़ातिर, जनमो की…
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ठुमक ठुमक कर नाचे कन्हैया
ठुमक ठुमक कर गोलू मोलू, मेरे मन को मोहता जाए सांवला रंग तीखे नैना, कानो में कुण्डल सजाये मनमोहक मुस्कान उसकी, माथे पर तिलक लगाये मटक मटक कर नाचे कान्हा, यशोदा मां को खुब हसाये माखन मिश्री प्यारे उसको, चोरी कर कर खाए खिलाये शिशु अवस्था में पुतना मारि, मुख में तीनो लोक दिखाये सारे…