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अधूरा
ना कली ही रहा ना फूल बन सकाकुछ ऐसे इश्क हमारा फनां हो गयाना इजहार किया ना इंकार कियाफिर भी न जाने ये कैसे बयां हो गयाशाम सुनहरी खिली, पंछी घर को चलेतेरा ख्याल ही हमारा मकां हो गया
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सेहत
ये जिम शीम ये वॉक शॉक ये योगा वोगा क्या हैजीने की चाहत में हांफता ये इंसान क्या हैछोले भटूरे छोड़ कर ग्लूटेन फ्री खाने वालोंतुम्हारी जीभ का बचा अब काम क्या हैसबका साथ सबका विकास तो प्रधानमंत्री भी कहते हैजब पेट ही नहीं निकला तो ये विकास क्या है
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वक्त
थक गया वक्त तुझसे मैअब तुम मिलने कल आनाजा सो जा अपने घर जाकर तू भीना करना कोई भी बहानाकल करूंगा तेरा इंतजार मैं भीअभी अकेला रहने देदो घड़ी तू भी सांस ले लेमुझको भी तू ठहरने दे
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अधूरा कलाम
एक कलाम और लिखो, शब्द चुराने है एक तान और छेड़ो, चुनने तराने हैचुप ना बैठा करो बसतुम बस सपने देखो, मैने वो अपने बनाने हैतुम्हारे कलाम और मेरे ख्याल, एक जैसे हैतुम्हारी सोच और मेरी बात, एक जैसे हैहाय हैलो क्या हाल और इधर उधर की कोई बात, और उनके पीछे जज्बात, एक जैसे…
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बेखबर
सरकते रेत से हर पलसंजोता छननी से हर कणन रुकता कोई भी आ करसमझाता खुद को अकेला पाकरनकल करता कुछ दिखने कीढूंढता खुद अपनी असलकहां जाए किसे ढूंढेहम तो खुदी से बेखबर
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गुम चुप
चुप हम भी चुप तुम भीचुप है ये तन्हाईयांनजर भी चुप हैअधर भी चुप हैखामोश है परछाईंयाआस भी गुम हैतलाश भी गुम हैगुम है सब पास भीखुद भी गुम हैबेखूद भी गुम हैगुम है एहसास भी
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दीवाली प्रार्थना
दीवाली पार्थनाहे राम दीप अब प्रज्वलित होकरो उजाला जग भर मेंहर कोने कोने में, हर तन मन मेंहर रग रग में, हर पल पल मेंदिखाए रोशनी अब दुनिया को, चमके भारत ऐसा जग भर मेंस्वास्थ्य वैभव सब को मिले, रहो आप सबके मन मेंहे दिव्य पुरुष अब आ जाओकरो रामराज अब इस जग मेंहे आदिपुरुष,…
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आज इसने फिर से ‘ना’ सुना है
‘आज’ फिर गुजरने लगा है’कल’ जैसा लगने लगा है’सन्नाटा’ चीख रहा है’स्याह’ आंख मींच रहा है’बेताबी’ थक रही है’खामोशी’ कुछ बक रही हैहर कोना मोन है’आइना’ पूछे तु कौन हैअधर सिर्फ थिरक रहा हैजवाब फिर उलझ रहा हैदिल कहीं छुप गया हैआज इसने फिर से ‘ना’ सुना हैइजहार जरूरी थोड़ी हैहर चाहत प्यार थोड़ी हैमन…
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स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी
आजादी की छुट्टी मनाने वालो – बहुत से मरने वालों ने ये बीड़ा उठाया था, हमारे आज के लिए अपना कल गवाया था गद्दारो ने हमेशा ही हमारी पीठ छिली थी, दुश्मन का लोहा हमने छाती पे खाया था वो भी सो सकते थे अपनी मां के आंचल में, भारत माँ की पुकार को उन्होनें…
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कुछ पंक्तियां
तुम मेरी कहानी की नजर बट्टू हो गईजब जब किसी को मुझसे रश्क हुआतेरी कहानी बता दी, नजर दूर हो गई चुप हम भी चुप तुम भीचुप है ये तन्हाईयांनजर भी चुप हैअधर भी चुप हैखामोश है परछाईंया आस भी गुम हैएहसास भी गुम हैगुम है सब पास भीरुक गई है पवन भीरुकने लगे है…