आज उनके लहजे में बदलाव आया है
लगता है जहन में कोई काम आया है
बावले समझे नहीं मुझको अब तलक
ढकोसले देखने का हुनर बचपन से पाया है
शिद्दत हैं कर्म है और गुमान है
आइने को शौंक हमने खुद बनाया है
लबों से बोलना आसान है बहुत
दिल लबों पर लाओ तो कोई बात हो
बिखेरते रहते हो मोती यहाँ वहां
तुम्हारी तो अमीरीयत का अंदाज अलग है
कब कहा कि मुझमें लालच नहीं है
बस अब और कुछ पाने की चाहत नही है
मेरे छूटे प्यालों से समुंद्र भरे इस दुनिया के
बूंदों का हिसाब रखने की आदत नही है
कुछ राज तो तेरे दिल में भी रहे होंगे
यूहीं नहीं तेरी आंखों में गहराई दिखती है
कुछ पन्ने तो तूने भी संभाल के रखे होंगे
ऐसे नही पुराने संदूक की चाबी किसी को नही मिलती है
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