
राम….
राम को कह पाऊं इतनी मेरी बिसात कहां
बाल्मिकी तुलसी भी बस कुछ ही कह पाए
और किसी में वो बात कहां!
राम सूर्य है राम चांद है
राम दिन है राम रात है
राम कण है राम मन है
राम पल है राम छन्न है!
राम आदि है राम अनादि है
राम अंत है राम अनंत है
राम बूंद है राम आकाश है
राम हवा है राम श्वास है
राम हनु है राम मान है
राम प्रभु है राम महान है
राम अंतर है राम विश्वास है
राम पत्र है राम शाख है
राम पतझड़ है राम बैसाख है
राम भूख है राम ग्रास है
राम शून्य है राम अन्नय है
राम जन्म है राम मरण है
राम काशी है राम मथुरा है
राम ईश्वर है राम खुदा है
राम अग्न है राम यज्ञ है
राम पाताल है राम गगन है
राम पिता है राम पित्र है
राम माता है राम मित्र है
राम ज्ञान है राम विज्ञान है
राम सूक्ष्म है राम ब्रह्माण्ड है
राम जीव है राम शरीर है
राम साधु है राम फकीर है
राम उंगलियां राम घमनिया
राम जिव्हा है राम इन्द्रियां
राम आंख है राम प्रकाश है
राम मौन है राम आवाज है
राम उर्ध्व है राम ईशान है
राम आग्नेय है राम वायव्य है
राम नैऋत्य है राम अधो है
राम मध्य है राम माधव है
राम लगन है राम मगन है
राम ध्यान है राम अंतर्मन है
राम स्वरूप है राम निर्रूप है
राम अयोध्या में राम लला रूप है
राम इधर है राम उधर है
जहां भी सोचो राम उधर है
राम धागा है राम पुतलियां
राम नृत्य है राम नृत्या
राम गौर है राम श्याम है
राम शिव है शिव में राम है
राम राम है जय सिया राम है
राम राम है राम राम है राम राम है राम राम है
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