The NavRas of Life

Deeper you go, Lighter you feel!

छलावे

मन एकाकी करता छलावे
चाहे सब कुछ, कुछ न पावे
अनजान पथ कैसे पथिक पहचाने
मन में मंजिल, कैसे समझावे
मृगतृष्णा सी भूख सजन की
पास नहीं फिर भी दिख जावे
मन एकाकी करता छलावे

Published by

Leave a comment