Author: SharadPrinja.com
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क्या है
तुम्हे मुझसे क्या है और मुझे तुमसे क्या हैइस छोटी सी जिंदगी में बड़ा गिला सा क्या हैयहाँ कौन सुन रहा है, यहाँ सब सिर्फ कहते हैइस शोर में सुनता खामोश सा ये क्या हैचटका हुआ शीशा आज टूट भी गयाउसमें से झांकता वो एक अक्स सा क्या है
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हुंकार
उठा अस्त्र और दिखा शस्त्रतू कृष्ण का है सुदर्शन चक्रनिर्भय होकर चला वज्रतू सनातन है अजर अमरब्रह्म ने तुझे बनाया हैविष्णु ने तुझे खिलायाअब शिव की बारी है, तांडव की तैयारी हैतेरी शक्ति है बजरंग बलीउनके आगे रावण की न चलीये कीड़े मकोड़े करते हुंकारतू क्रोधित हो दे टंकारये सब बिलों में घुस जाएंगेखंड खंड…
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पीने दे
मुझे शराब पीने देबेहिसाब पीने देकुछ तेरे जाने का असर हैकुछ तेरे आने की खबर है बेअख्तियार मुझे होने देआज सब्र खोने देमुझे शराब पीने देबेहिसाब पीने दे
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धुंधला सा हुआ मैं
मकड़ियों के जाल मेंअपने ही ख्याल मेंउलझे हुए सवाल मेंवक्त की रफ्तार मेंखोता हुआ सा मैं आकांक्षाओं के दवाब मेंऔर दिखने की चाह मेंमुखोटो के बाजार मेंउपस्थिति के अभाव मेंधुंधला हुआ सा मैं वक्त को ढूंढतारेत को दबोचताखुद को नकारताशीशे को निहारताविलुप्त हुआ सा मैं
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आज खुद से बात करले
आज करने दे बात खुद देआज खुद को मनाने देआज खुद से मिल लेने दे आराम सेआज खुद पर मुस्कुराने देआज न छोड़ खुद को अकेलाआज खुद के साथ वक्त बिताने दे
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Random
आज फिर खुद की याद आईआज फिर ढूंढ ना पायाआज फिर पायी भीड़ खुद मेंआज फिर अकेला था साया बस इश्क इतना सा होने से रह गयामैं उसकी आंखो में गुम होने से रह गयाबार बार मिल जाता था वो नसीब की तरहबस हाथ की लकीर्रो में लिखने से रहा गयाबड़ी मासूमियत से उसने राह…
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घर
मैं रहा बड़ी इमारत में होटल पांच सितारा मेंहसीन चेहरे मुस्कुराते चारो ओर थेशराब व्यंजन परोसते लोग थेबिस्तर मुलायम थावातानुकूलित कमरा रहने लायक थासत्कार में कमी न थी पर नींद पास खड़ी न थीकरवटे बदलते रहेधड़ियां गिनते रहेआराम तो दिखता था पर सुकून नहीं मिलता थावो तो मां के साथ में थापत्नी की बात में…
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मैं हिंदू हूं
मैं हिंदू हूं मैं धरा हूं ज्ञान की, विज्ञान की, ध्यान कीमैं इतिहास हूं संसार का, उपज का, विनाश का मैं जनक हूं गणित का, धर्म का, कर्म का मैं ज्ञाता हूं, भूत का, वर्तमान और भविष्य कामैं बीज हूं बुद्ध का, नानक का, महावीर का मैं गुरु हूं हर संत, साधु और फकीर का…
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राम
राम…. राम को कह पाऊं इतनी मेरी बिसात कहांबाल्मिकी तुलसी भी बस कुछ ही कह पाए और किसी में वो बात कहां! राम सूर्य है राम चांद हैराम दिन है राम रात हैराम कण है राम मन हैराम पल है राम छन्न है! राम आदि है राम अनादि हैराम अंत है राम अनंत हैराम बूंद…