Author: SharadPrinja.com
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झूठ
वो बड़ी संजीदगी से गिना रहा था अपनी मजबूरियांमुझे भी शौंक था झूठ को संजीदगी से सुनने का यकीन करो आपके हर झूठ को सच मानता हूंऐसे थोड़ी ही हर बात पर हां निकलती है बस यही बात समझा रहा था तुझेवो तेरा शक्स कभी मेरा अक्स थाबस बता रहा था तुझे
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तुम कौन हो
एक गजल के ख्याल गुम हैकोई तो मिलाओ उन्हेंवो खुद कितनो का ख्याल हैकोई तो बताओ उन्हे तुम कौन हो? तुम वो ही जिससे मैं बाते करता हूं, जब पास नहीं होते हो तब भीतुम वो हो जिसे मैं सुना करता हूं, जब कुछ नहीं कहते हो तो भीतुम वो हो जिसे मैं निहारा करता…
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कृष्णा दरस की हूंक
अच्छा लगता है जान कर कि तू भूला नहीं मुझे कभी कभी तो मैं भी याद कर लेता हूं तुझेअक्सर राहें मोड़ कर बुलाता है जिद्द सेये तेरी मेरी बात है समझाऊँ और किसेमैं तो भूल जाता हूं ज़िंदगी की दौड़ धूप मेंतू कहां व्यस्त है जो देर से बुलाता है मुझेकुछ तो ख्याल कर…
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Jaun Elia और मैं
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे और मैं – ये भी सच सच बात बताओ उसकी मदहोश सांसों कावो जो उसमे महकते होंगे, क्या होश में आ पाते होंगे? ये भी तो बतलाओ अंधेरे में लिपटी रातों काक्या जुगनू…
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कुछ पंक्तियां
कर्म ही तो अपने है बाकी सब पराया हैखुश रहना ही जीना है बाकी तो सब माया है हर कर्म का हिसाब होगा, सारे विचार खंगाले जाएंगेवक्त आइना लेकर बैठेगा, अक्स कैसे संभाले जाएंगे ये जिंदगी का चक्कर है, सब लौट कर आयेगाबोता है पेड़ बबूल का, आम कहां से पाएगा
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मुस्कुराहट
होंठो को थोड़ा खोल के गालों को पीछे खिसकाया करो इसे मुस्कुराहट कहते है जनाब ये खुदा की नियमत तुम्हे सीखा दी अब इसे रोज दोहराया करो
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ज़िंदगी by असिता
जब लगेगा सब सीख चुके होतो वहम तुम्हारा कुचल देगीये ज़िदगी है साहब, फैसले बदल देगीनर्म रखना इस थोड़ा तेवर अपनावर्ना ये फिर कोई नई चाल चल देगी …..असिता ज़िंदगी में नयापन बौहोत ज़रूरी हैजिंन रास्तों पे चलकर सिर्फ तजुर्बे हासिल हुए,ठीक है ,मगर अब उन रास्तों से दूरी ज़रूरी हैथक गए हो तो थमकर…
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लहजा
आज उनके लहजे में बदलाव आया हैलगता है जहन में कोई काम आया हैबावले समझे नहीं मुझको अब तलक ढकोसले देखने का हुनर बचपन से पाया हैशिद्दत हैं कर्म है और गुमान हैआइने को शौंक हमने खुद बनाया है लबों से बोलना आसान है बहुतदिल लबों पर लाओ तो कोई बात हो बिखेरते रहते हो…