
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
और मैं –
ये भी सच सच बात बताओ उसकी मदहोश सांसों का
वो जो उसमे महकते होंगे, क्या होश में आ पाते होंगे?
ये भी तो बतलाओ अंधेरे में लिपटी रातों का
क्या जुगनू चांद सितारे सब उजाले करने आते होंगे?
मधुकर तुम भी हाल बताओ, उनकी मीठी बातों का
वो जो उनसे बोलते होंगे,क्या तुमसे मीठा शहद पाते होंगे?
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