Author: SharadPrinja.com
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कुछ कुछ अधूरा
प्यार तुमने भी किया मैंने भी लियाइज़हार तुमने भी किया मैंने भी कियादुनिया को बताने की हिम्मत न मैंने की न तुमने कीअधूरा रहने का फ़ैसला मैंने भी किया तुमने भी किया कुछ कुछ अधूरा रह जाए तो अच्छा हैसबकुछ न कह पाये तो अच्छा हैकम दिखते है हंजू जब मैं चलता हूंसबको सबकुछ न…
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आज कल
तुमको तो पता है राते कैसे गुजर रही है आज कलखुली आंखों में नींद बसर रही है आज कल जानते हो तो बोलते क्यूं नहींअब और किससे झूठी तारीफ सुन रहे हो आज कल देखना सुनना मुस्कुराना सब बीत गयाकिसके फरेब में फस रहे हो आज कल पास से निकल गए नजर चुरा करलगता है…
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इंतजार
सही वक्त के इंतजार में उम्र गुजार दीलोगो ने बुरे वक्त में भी त्योहार सजा लिय तुम ख्वाहिश करते रहे सच होने कीहमने झूठ को ही सच का फरमान मान लिया नींद आंखों मे रही, ज़हन में न पहुंचीहमने करवट को ही नींद का एहसान मान लिया खरखराहट सूखे पत्तों के हिलने की हुईखामोशी को…
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करवाचौथ
ए चांद निकल आना आज सुबह सुबह हीक्यों इतने चांदो को है प्यासा रखता क्यों डर नहीं तुझे इन प्यासी आहो कानिकल जल्दी तुझे चांदनी का वास्ता पानी की बूंद भी आज कमाल करती हैवो पी ले तो हम निकले, ना पिए तो उम्रदराज करती है तेरा वादा जान बचाने का सच्चा नही रहाकितने वर्त…
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गिला शिकवा शायरी
तुम्हे शिकवा मेरी मौजूदगी से हैये लो हम गुमशुदा हो गएमुस्कुराओ तुम अकेले हो अबऐसे क्यों गमज़दा हो गए —— ****** ——- कैसी तबियत है गुलिस्तां के फूल की, कांटे पत्तियां झाड़ कर जो मुस्कराना चाहता थामिट्टी से दूर होकर साफ रहने की हवस, अकेला ही टहनी पर खिलखिलाना चाहता थामाली ने तोड़ कर रौंदा…
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गजल तुम पर
ये जो पूरा का पूरा अधूरा छोड़ रहे होअनबने रिश्ते तोड रहे होनफरत घोसलो के तिनकों से है गरतो सिर्फ तिनका निकालो, घोसला क्यों तोड रहे हो जो मिला ही नहीं वो छोड़ दियाअंगूर खट्टे है आखिर बोल ही दियाहर बात में नुक्स देखने का हुनरक्या तुमने भी आइना तोड़ दिया खामोशी से देखता हूं…
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एहसास और अल्फाज
बहुत समझाया था एहसासो को,मत मिलो अल्फाजों से बिगड़ जाओगे जब तक तन्हा हो महफूज हो तुमअल्फाज बन गए तो रोड पर आ जाओगे मेरे निजी हो तो चहकते रहते हो ख्यालों में सारा दिनमहफिल ए आम हो गए तो ये प्यार कहां पाओगे कोई तोड़ेगा, मुंह मोड़ेगा, हसेगा तुम परएक वाह के लिए बार…
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Khwaab
ऐ ख्वाब कभी दिन मे भी आया करोआंखे भी तो जाने की तु दिखता क्या है निकलते नही जागकर देखे सपनेआंसु पूछते है आंखो मे रड़कता क्या हैं तेरी पलको की झलक जब याद आती हैंमेरी पलको मे फडकता क्या हैं मेरे ख्वाब कभी उनकी नींद मे भी हो आया करवो भी तो जाने हमारा रिश्ता…
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बन्दर बाँट
दो बंदर बनके सिकंदर, अखंड के 2 खंड करवाएदोनो बने मुखिया खंडो के, 1947 को जीत कहायेभेड़ चाल जनता में ऐसी, जनेऊ पगड़ी टोपी भिड़ जाए धर्म के नाम पर देश बांटा, फिर सेकुलरिज्म के गाने गाये जिन्नहरू मैंने नहीं बोलै, फिर भी समझना है जो समझ जाए जनता रानी बड़ी सयानी ,आँख बंद कर…